Level-3_Lecture-9

श्लोका: सुभाषितं च | SHLOKAS & SUBHASHITAM

नियतं कुरु कर्म त्वं, कर्म ज्यायो ह्यकर्मण: | शरीरयात्रापि च ते, न प्रसिद्धयेदकर्मण: ||

(हे मनुष्य) नित्य कर्म करता जा, शरीर यात्रा (निर्वाह) अकर्म से सिद्ध नहीं होगा |


यो न ह्रष्यति न द्वेष्टि, न शोचति न काङ्ग्क्षति | शुभाशुभ परित्यागी भक्तिमान् य: स मे प्रिय: || 

जो हर्ष तथा शोक नहीं करता और न ही कोई आकांक्षा रखता है, शुभ अशुभ को जिसने त्याग दिया है वह भक्तिमान मनुष्य मुझे प्रिय है | 


य: शास्त्रविधिमृत्सृज्य, वर्तते कामकारत: | न स सिध्धिमवाप्नोति, न सुखं न परां गतिम् || 

शास्त्रों की अवहेलना कर के अपनी मनमानी करने वाला न तो कोई सिद्धि प्राप्त करता है, न ही कोई सुख अथवा परम गति प्राप्त करता है |


श्रेयो हि ज्ञानमभ्यसाज्ज्ञानाद्ध्यानं विशिष्यते | शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान् य: स मे प्रिय: || 

अभ्यास से श्रेष्ठ (बढ़कर) ज्ञान है, उससे बढ़कर ध्यान है | ध्यान से बढ़कर कर्मफल त्याग है जिससे मनको शांति मिलती है |


विहाय कामान् य: सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः। निर्ममो निरहंकारः स शांतिमधिगच्छति।।

जो मनुष्य सम्पूर्ण कामनाओंका त्याग करके स्पृहारहित, ममतारहित और अहंकाररहित होकर आचरण करता है, वह शान्तिको प्राप्त होता है।


जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च। तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि।।

क्योंकि पैदा हुएकी जरूर मृत्यु होगी और मरे हुएका जरूर जन्म होगा। इस (जन्म-मरण-रूप परिवर्तन के प्रवाह) का परिहार अर्थात् निवारण नहीं हो सकता। अतः इस विषयमें तुम्हें शोक नहीं करना चाहिये।


क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते। क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप।।

हे पृथानन्दन अर्जुन ! इस नपुंसकताको मत प्राप्त हो; क्योंकि तुम्हारेमें यह उचित नहीं है। हे परंतप ! हृदयकी इस तुच्छ दुर्बलताका त्याग करके युद्धके लिये खड़े हो जाओ।


उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्। आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ||

अपने द्वारा अपना उद्धार करे, अपना पतन न करे; क्योंकि आप ही अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है।


असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलं। अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते।।

हे महाबाहो ! यह मन बड़ा चञ्चल है और इसका निग्रह करना भी बड़ा कठिन है — यह तुम्हारा कहना बिलकुल ठीक है। परन्तु हे कुन्तीनन्दन ! अभ्यास और वैराग्यके द्वारा इसका निग्रह किया जाता है।